मैंने हमेशा सोचा है की शादी दो परिवारों के बीच में संयोजन होती है, दो इनसानों के बीच में संयोजन नहीं। मुझे ऐसे लगता था क्योंकि मैं एक भारतीय परिवार मैं बड़ी हुई थी। अब मैं सीखने लगी हूँ की शादी का संस्थान बहुत सारी औरतों की ज़िंदगी में नुक़सान पहुँचाता है। क्योंकि मैं अमेरिका में रहती हूँ, मेरे लिए शादी के संस्थान से खास बंधन नहीं है। लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। वहां शादी के संस्थान से औरतों की ज़िंदगी पर काफ़ी बड़ा बंधन है क्योंकि शादी के कारण औरतें ज़्यादा पढ़ाई नहीं कर सकते ओर नौकरी नहीं कर सकते।
हिंदू धर्म में, शादी एक धर्मशास्त्र, मनु स्मृति, के अनुवाद से आती है। इस शास्त्र में लिखा था की शादी को कैसे करना चाहिए और कौन से तरीक़े से लोग शादी कर सकते है। इसमें आठ प्रकार की शादियों के बारे में लिखा है। इन में से चार प्रकार की शादियों धार्मिक है और बाकी चार पापी है। सारी शादियों के तरीक़े में पति के लिए उचित पत्नी ढूंढने को प्राथमिकता देता है ये शास्त्र। शास्त्र तो मर्द की भलाई को प्राथमिकता देता था, लेकिन फिर भी औरतों के पास काफ़ी स्वतंत्रता थी शादी मैं क्योंकि वह ख़ुद अपना पति चुन सकती थी स्वयंवर से। स्वयंवर में वर प्रतियोगिता में शामिल होते थे और औरतें प्रतियोगिता के परिणाम के आधार पर अपने पति चुन सकते थे। लेकिन ये तो बहुत पहले की बात है। अब ऐसा नहीं है।
आज की भारतीय समाज में, शादी औरतों के लिए बंधन है। जब औरत की शादी हो जाती है तो उसकी ज़िंदगी उसके पति के हुक्म पे चलती है। शादी के कारण औरतों को पढ़ाई रोकनी पड़ती है और इस वजह से वह ख़ुद नौकरी नहीं कर पाती। इसलिए वह ख़ुद कमा नहीं पाती, तो फिर उसको पति के भरोसे ही रहना पड़ता है। और तो और, लड़की के माँ-बाप भी मजबूर होते है क्योंकि उनको ही शादी कराने के लिए पैसे, और कभी दहेज भी, देनी पड़ती है। हमने कुछ दिन पहले एक NGO के लोगों के साथ बात करी थी, और वह बता रहे थे की भारत के लॉकडाउन के कारण कम लोग एक साथ इकट्ठा हो सकते थे, तो काफ़ी सारे माँ-बाप ने, कम पैसे लगाने के चक्कर में, इस बंधन का लाभ उठाया और अपनी 15, 16 साल की लड़कियों की शादी करवाई। अब ये लड़कियां पढ़ नहीं पायेंगी और बस अपने पति की सेवा करते रह जायेंगी।
अमेरिका में ऐसा शादी का बंधन नहीं है। लेकिन फिर भी शादी औरतों के लिए आसान नहीं है। यहाँ औरतें पढ़ाई करने के बाद शादी कर सकते है और शादीशुदा हो कर भी नौकरी कर सकते है। लेकिन फिर भी ज़्यादा कर घर का काम औरतें ही सम्हालती है। इसलिए घर में काम का असमान विभाजन है, और पति-पत्नी का भागीदारी असमान है। ये एक समस्या है हमारे समाज में क्योंकि इसके कारण शादीशुदा औरतों की सेहत ज़्यादा ख़राब है शादीशुदा मर्दों की सेहत से। इस प्रकार अमेरिका में भी औरतों को शादी से नुक़सान होता है। मर्दों को भी घर के काम करने चाहिए ताकि दोनों शादीशुदा औरतों की सेहत और शादीशुदा मर्दों की सेहत अच्छी रहे।
मेरे खयाल से भारत में शादी से जुड़ी समस्याओं को हटाने के लिए, सरकार को कानून बनाना चाहिए जो कहता है की इनसान को कम से कम 21 साल की उम्र होनी चाहिए शादी करने के लिए। इससे सब लोग पूरी स्कूल की पढ़ाई कर पायेंगे शादी करने के पहले। फिर लोगों के पास कॉलेज शुरू करने का भी अफसर होगा शादी से पूर्व। फिर दोनों लड़का और लड़की नौकरी कर पायेंगे और साथ में घर चला पायेंगे। फिर औरतों की ज़िंदगी सिर्फ उनके पति के भरोसे नहीं रहेंगी। इस प्रकार औरतें भी स्वतंत्रता के साथ जी पायेंगी।
इसके अलावा सब समाज के लोगों को भी अपनी सोच बदलनी चाहिए औरतों के बारे में। अभी तो लोग सोचते है की औरत को सिर्फ शादी करनी चाहिए और फिर उनको कुछ और करने की आवश्यकता नहीं है। लोग ये भी सोचते है की लड़की को लड़के के लिए अच्छा होना चाहिए जब लड़केवालें लड़की को देखने के लिए जाते है। मेरे विचार से लोगों को ये भी सोचना चाहिए की लड़का लड़की के लायक़ है या नहीं। लोगों को ये भी सोचना चाहिए की एक लड़की के लिए शादी करने से पढ़ाई करनी ज़्यादा महत्वपूर्ण है।