Tu Hounsla Rakh…

पतझड़ में भी,

फिरसे फूल खिलेंगे,

तु हौंसला रख,

इन कालस की खानो में,

हीरे मिलेंगे,

तु हौंसला रख,

कोन मिटा स्का है तुझे,

कितने दुःख, तकलीफ और नाकामिया आयी,

तू ज़िंदा है, कुछ गुमा तोह रख,

देख नए अब राह खुलेंगे,

तु हौंसला रख,

कभी जलाया आग ने तुझे,

अब देख, आग से खेलता चला है,

कभी डुबाया सागर ने तुझे,

अब देख, इन लहरों पे बैह चला है,

फ़ितरत-इ- इंसान तेरी है यहि,

तु गिरेगा तोह उठने के लिए,

तु छुएगा आफ़ताब भी, अब दूर नहीं,

यह अँधेरा अब जल्द ही ढलेगा,

तू हौंसला रख,

चाहे कितना ही पैना हो रास्ता,

तु चाल बदल चल ही लेगा,

चाहे कितनी ही मुश्किल आये तुझ पर,

तु किस्मत अपनी बदल ही लेगा,

शायद कम आंकता है खुद को तु,

तुझे पता नहीं तू क्या बला है,

फिरसे ये मौसम बदलेंगे,

तू हौंसला रख….

Avi Jain Written by:

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