Mein Kabhi…

मैं कभी तेरी ज़ुल्फ़ों में लहराता था,

मैं कभी तेरे होंठों पे रहता था,

मैं कभी धड़कता था तेरे दिल की धड़कन में,

मैं कभी तेरे अश्कों में पनपता था,

 

 

मैं था कभी तेरी पायलों की छम छम में भी,

मैं कभी तुझे, तेरे दर्पण में दिखता था,

तू मुझे पहन कर निकलती थी हर रोज़,

मैं कभी तेरे कंगनों में खनकता था,

 

 

मैं देख लेता था दुनिया तेरी आँखों से ही,

मैं कभी तेरी साँसों में बस्ता था,

तेरी हर बेचैनियाँ मुझी से थी कभी,

मैं कभी तेरी फ़िक्रों में रहता था…

Avi Jain Written by:

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